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गुलाम नबी आजाद का कांग्रेश छोड़ने का कारण big न्यूज

गुलाम नबी आजाद का कांग्रेश छोड़ने का कारण

कहने को तो एक फिल्मी पोस्टर आपको लग रहा होगा, लेकिन आज की जो फिल्म राजनीति हुई है कांग्रेस पार्टी में उसकी कहानी भूतनी की फिल्मी गुलाम नबी आजाद कांग्रेस के उन चुनिंदा नेताओं में से एक थे जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से लेकर पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की सरकार में हर बार मंत्री के तौर पर काम किया और संजय गांधी उनके सबसे करीबी दोस्तों में से थे। लेकिन सोचिए जिस नेता ने कांग्रेस में 52 वर्ष बता दिए। मैंने अपना आधे से ज्यादा जीवन बिता दिया। समर्पित कर दिया। आज उसी पार्टी में अपमानित होने के बाद उन्हें यह कहना पड़ा कि अब मैं आजाद होना चाहता हूं इसलिए! 

खबर का संपूर्ण विश्लेषण आपके लिए करेंगे और बताएंगे कि वह नबी आजाद का जाना कांग्रेस और उससे भी ज्यादा गांधी परिवार के लिए कितना घातक हो सकता है। बताते हैं जो गुलाम नबी आजाद ने सोनिया का। 

अपनी आजादी का एलान करने के लिए है ना कि सोनिया गांधी अपना इलाज कराने के लिए इस समय अमेरिका में है। वह भी देश में और राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी उनके साथ है।  गांधी परिवार के तीन सदस्य हैं। वह इस समय भारत में नहीं है और उन तीनों की गैरमौजूदगी में जिस की टाइमिंग आप देखिए तीनों ही भारत में नहीं है। तीनों विदेश में और ऐसे समय में गुलाम नबी आजाद ने आज 26 अगस्त 2022 को 5 पन्ने की यह चिट्ठी लिखी है|

 जो आज मैं आपके लिए भी लेकर आया और मैं आपको बताऊंगा। इस चिट्ठी में क्या लिखा ही लिखी है। इसमें साथ बड़ी बातें हैं। पहली बार वर्ष 2013 से पहले सोनिया गांधी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पार्टी के सीनियर नेताओं की बातों को गंभीरता से लिया जाता था और उन्हें काम करने की लेकिन जनवरी 2013 में जब राहुल गांधी कांग्रेस के उपाध्यक्ष। किस के बाद कांग्रेस पार्टी के बड़े और अनुभवी नेताओं को पूरी तरह से साइडलाइन कर दिया गया और उनकी जगह से नेताओं की मंडली और राहुल गांधी के छात्रों की मंडली आ गई जो पार्टी से जुड़े मामलों में बड़े फैसले लेने लगी और जिनके पास अनुभव बिल्कुल नहीं दूसरी बार 2013 में ही राहुल गांधी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री और सरकार द्वारा जारी किए गए अध्यादेश को फाड़ कर फेंक दिया था। आपको याद होगा। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हैं और वह लिख रहे हैं। राहुल गांधी का व्यवस्था और उनके त्यौहार की वजह से कांग्रेस पार्टी 2014 का लोकसभा चुनाव भारत सरकार की जो गरिमा होती है|

 उससे बहुत पार्टी संगठन में सुधार के लिए और पार्टी के। 

और पिछले 9 वर्ष से कांग्रेस पार्टी के दफ्तर के शोरूम में धूल खा रही है और उसे कभी भी लागू नहीं किया गया। 2014 के बाद सोनिया गांधी और राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी दो लोकसभा चुनाव पूरी तरह से हारी इसके बाद 2014 से 2022 के बीच 49 विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें से 39 चुनाव कांग्रेस करना

Koi तरीके से हारी और जिन्होंने उसे पूर्ण बहुमत मिला था। अब उनमें से भी सिर्फ दो राज्यों में ही उसके सरकार बची। यहां पर हमें आपको एक बात बताना चाहेंगे कि 

अगर पूछिए कि हमारे ऐसा मान कर चलिए।

 क्या हमारी भारतीय क्रिकेट टीम का कोई कप्तान है और उसने 49 मैच खेले। उसकी कप्तानी में भारत के बीच में और 49 में से 39 मैच हार जाए तो क्या उसकी कप्तानी रहेगी क्या उसकी कप्तानी बचेगी। क्या लोग कहेंगे कि तो फिर भी कप्तान रहना चाहिए। 49 में से 39 मैच कोई भी हार जाए आप उन? 39 असाइनमेंट तक रात को दी गई है। आपके अपने दफ्तर में आप कहीं भी काम करते और 49 में से 39 असाइनमेंट में आप पर हो जाए। 39 प्रोजेक्ट में फेल हो जाए तो क्या की नौकरी बचेगी। क्या आप की कप्तानी बच्चे क्या आप की कुर्सी बचेगी, लेकिन यह अकेली कांग्रेस पार्टी है जो 49 चुनाव हार गई। 

फिर भी लोग राहुल गांधी को ही अध्यक्ष बनाने की बात कर रहे हैं और आज भी राहुल गांधी बड़े फैसले ले रहे हैं। इसमें जो लिखी है कांग्रेस पार्टी आज रिमोट कंट्रोल मॉडल पर चल रही है और सुरियागांधी तो सिर्फ नाम के अध्यक्ष हैं। पार्टी के सारे बड़े फैसले राहुल गांधी उनके चाटुकार उनके पीए और उनके सिक्योरिटी गार्ड्स लेते हैं। यह बहुत बड़ा आरोप गुलाम नबी आजाद ने लगाया है और कहा है कि राहुल गांधी की उम्र कितनी है और यहां तक कि उनके सिक्योरिटी गार्ड बड़े फैसले लेते हैं 2020 में पार्टी में। सवाल उठाए थे, चिंता जताई थी। उन सभी नेताओं पर हमले किए गए। उन्हें अपमानित करने वाले नेता कांग्रेस नेता की चापलूसी कर रहे थे। सोचिए गुलाम नबी आजाद खुद लिख रहे हैं कि हमने सारे सुझाव दिए थे। उन नेताओं ने पार्टी को मजबूत कर सके कि हमारे साथ बहुत बुरा हुआ हमारा अपमान किया गया और यह सब राहुल गांधी के कहने पर लिखते हैं कि कांग्रेस पार्टी ऐसी स्थिति में पहुंच गई है। इसका कुछ नया नेता अगर अध्यक्ष बनेगा। भी को एक कठपुतली से ज्यादा कुछ नहीं होगा जो गांधी परिवार के इशारों पर नाचेगा और अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव किसी तमाशे से ज्यादा कुछ नहीं। 

भारत जोड़ो नहीं। कांग्रेस जोड़ो यात्रा निकालनी चाहिए। वह कह रहे हैं कि पहले अपनी पार्टी को तो जोड़ो भारत को बाद में जुड़ने पार्टी को तो जोड़ो भारत को बाद में जोड़ अब आपको ही बताते हैं कि गुलाम नबी आजाद से कांग्रेस छोड़ने से कांग्रेस पार्टी को पार्टी को क्या वाकई कोई नुकसान होगा या कोई नुकसान नहीं होगा। इस राजनीतिक घटनाक्रम से सबसे ज्यादा नुकसान असल में कांग्रेस से भी ज्यादा नुकसान गांधी परिवार को होगा क्योंकि गुलाम नबी आजाद ने पार्टी छोड़ने की वजह गिनाई है। मैं राहुल गांधी का नाम सबसे ऊपर है। गांधी परिवार की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठेंगे और पार्टी पर गांधी परिवार के पकड़ और कमजोर राहुल गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनने की संभावना थी। उन संभावनाओं को इस्तीफे से बहुत बड़ा धक्का लगेगा और एक नेता के तौर पर उनकी स्वीकार्यता। चाय को पार्टी में पार्टी के बाहर हो उसे पार्टी छोड़ सकते। इसके खिलाफ सपने को भी इस इस्तीफे से झटका लगेगा और सबसे है गुलाम नबी आजाद का इस्तीफा परिवारवाद पर सबसे बड़ी छूट है और आप सब जानते हैं कि राहुल गांधी को परिवारवाद की राजनीति का सबसे बड़ा पोस्टर बॉय माना जाता है और आज भी छुट्टी में लिख कर गए हैं। हर बात परिवारवाद के खिलाफ जकिया 

Gulam Nabi Azad ka Congress se sambandh

गुलाम नबी आजाद का जन्म जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में हुआ था और वर्ष 1970 के बाद कांग्रेस में शामिल 1973 में 24 साल के थे। तब उन्हें डोडा जिले में कांग्रेस का ब्लॉक सचिव नियुक्त किया गया। गांधी के पुत्र संजय गांधी नबी आजाद के काम से इतना खुश हुए कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष बनने के लिए कहा और यह बात 1975 की गुलाम नबी आजाद कहते हैं कि संजय गांधी के काफी समझाने के बाद उन्होंने 1975 से 70 तक यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में काम किया और इस दौरान संजय गांधी और उनकी बहुत गहरी गुलाम नबी आजाद और संजय गांधी बहुत गहरे दोस्त के बाद गुलाम नबी आ गए और उन्होंने जनता पार्टी की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन इस दौरान उनकी गिरफ्तारी दी। इसके अलावा संजय गांधी गुलाम नबी आजाद के करीबी थे। जब 27 मार्च 1980 को उनकी शादी हुई तब उनके विवाह में शामिल होने के लिए संजय गांधी हॉस्पिटल गई थी। इंदिरा गांधी ने गुलाम नबी आजाद पर काफी भरोसा करना शुरू कर दिया क्योंकि वह उनके पुत्र के बहुत गहरे दोस्त 1980 में उन्हें इंडियन यूथ कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। राजीव गांधी ने पहली बार इंडियन यूथ कांग्रेस की सदस्यता ली थी। यानी राजीव गांधी को कांग्रेस ज्वाइन कराने वाले नेता गुलाम। 

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